Tuesday, 8 November 2016

पढ़े और शेयर करे: परोस रहे वेटर को मिली खुशखबरी-तुम तो IAS बन गए, यह सुन आंखों से गिरने लगे आंसू

नई दिल्लीः एक कॉफी प्लीज...। जी सर अभी लाया...। हर रोज सुबह से शाम तक इसी अंदाज में फरमाश सुनने और पूरी करने वाले के जयगणेश ने सपने में नहीं सोचा था कि एक दिन वे वेटर से साहब बन जाएंगे। मगर सपने ऊंचे हों और कठिन मेहनत-पक्का इरादा हो तो रेत से भी तेल निकाला जा सकता है। यह साबित कर दिखाया गरीबी में पले-बढ़े जयगणेश ने। पैसे की कमी पूरी करने के लिए दिन भर होटल में नौकरी करते-करते भी पढ़ाई और तैयारी जारी रखी। मेहनत रंग लाई और किस्मत आखिरकार बुलंद हो ही गई। 2008 में आखिरकार सातवें प्रयास में जयगणेश सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफल रहे।

आज तमिलनाडु काडर में बतौर आईएएस अफसर सेवा दे रहे।
उस दिन का वाकया जयगणेश कैसे भूल सकते हैं। जब किसी का आर्डर लगा रहे जयणगेश को अचानक टोकते हुए दोस्त ने कहा- तुम अब वेटर नहीं रहे, साहब बन गए। लो मुंह मीठा करो। अब तो तुम्हारा आर्डर चलेगा, तुम्हारी फरमाइश चलेगी। जैसे ही दोस्त ने यह खुशखबरी सुनाई तो जयगणेश रो पड़े।
पढ़िए संघर्ष की कहानी
तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के विनावमंगलम गांव के गरीब परिवार में जन्मे जयगणेश चार भाई-बहनों में सबसे बड़े रहे। पिता एक कारखाने में मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पेट पालते थे। पढ़ने में के जयगणेश बचपन से ही अव्वल रहे। उन्होंने 91 प्रतिशत अंकों के साथ 12 वीं की परीक्षा पास की। अच्छे प्रतिशत से इंटरमीडिएट पास होने पर पिता को लगा कि बेटा उनकी गरीबी दूर कर सकता है। इसलिए उसे अच्छी पढ़ाई किसी भी कीमत पर दिलानी चाहिए। पिता ने इधर-उधर से कर्ज लेकर के जयगणेश का दाखिला तांथी पेरियर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कराया। जहां मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद जयगणेश की नौकरी एक कंपनी में लगी। महज ढाई हजार रुपये महीने में मिलते थे।
सपने पूरा करने के लिए बन गए वेटर
महज ढाई हजार रुपये में बाहर रहने का अपना खर्च पूरा ही नहीं हो पा रहा था तो परिवार की मदद की बात ही छोड़िए। जबकि जयगणेश के दिल में हमेशा यह बात थी कि उन्हें आईएएस बनना था। फिर जयगणेश एक होटल में वेटर की नौकरी करने लगे। ताकि कुछ पैसे मिलें तो आईएएस की तैयारी जारी रखने के साथ परिवार की भी मदद कर सकें। दिन में वेटर की नौकरी करते और रात में घर जाकर कठिन पढ़ाई करते। इस दौरान आईबी(इंटेलीजेंस ब्यूरो) की परीक्षा पास की। मगर जयगणेश की मंजिल सिर्फ आईएएस अफसर के सफर तक थी। इस पर उन्होंने आईबी की नौकरी नहीं की। फिर सातवीं बार सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास की। जब रिजल्ट आया तो जैसे आज मैं ऊपर आसमां नीचे वाला हाल रहा। वेटर की नौकरी करने वाले के जयगणेश का नाम सफल अभ्यर्थियों की ऑल इंडिया रैकिंग में 156 वें नंबर पर था। जब होटल के स्टाफ को जयगणेश के आईएएस बनने का पता चला तो सब अपने साथी के अफसर बनने पर खुशी से नाच उठे।

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